Thursday, February 18, 2016

जन-मन में प्राण फूंकती ‘वागड़ गंगा माही’







श्रद्धा और कृतज्ञता दर्शाने का पर्व है ‘माही महोत्सव’

- कमलेश शर्मा

    प्रज्ञा उर्वरा वागड़ भूमि को सस्य स्यामल और समृद्धि से संपृक्त बनाने का एकमात्र श्रेय जाता है ‘वागड़ गंगा माही’ को। मध्यप्रदेश के अमरकंटक पर्वत से आविर्भूत होकर यह सदानीरा अपनी नहरों रूपी धमनियों से बांसवाड़ा जिले के एक बड़े क्षेत्र तक अमृत का संचार करती है और जन-मन में प्राण फूंकने वाली ‘माही’ की हरेक बूंद इस अंचल के रहवासियों में रक्त बनकर इसकी जयगाथा को बखानती प्रतीत हो रही है। इस अंचल के जन-जन के चेहरे का तेज, दिल की धड़कन, मन का उल्लास  और बाजुओं का दमखम सिर्फ और सिर्फ माही की ही देन है। विकास और उल्लास की इसी देन पर कृतज्ञ अंचल द्वारा ‘माही मैया’ के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का पर्व है ‘माही महोत्सव’, और अगले दो दिनों में संपूर्ण बांसवाड़ा जिला इसी लोकोत्सव के रंगों में रंगा नज़र आएगा। इस दौरान धरा से आसमां तक दिखेगी उल्लसित जनगंगा के मन से उठती तरंगे और श्रद्धा उमड़ाता खुशी का महासागर। 

    पौराणिक संदर्भों में भी पुण्यदायी है ‘माही मैया’: 

    माही नदी का उल्लेख पुराणों में भी किया गया है । स्कन्द पुराण के कुमारिका खण्ड में इस बात का उल्लेख है कि इन्द्रद्युम्न नामक राजा द्वारा विध्याचल के अमरकंटक पर्वतश्रेणी स्थान पर किए गए यज्ञ की अग्नि से तप्त धरा से निस्सृत जलधारा ही माही नदी है। इस तरह विध्याचल के अमरकंटक पर्वतश्रेणी से आमझरा नामक स्थान से माही नदी का उद्गम माना जाता है और यह नदी विध्याचल से 120 किलोमीटर बहने के बाद बांसवाड़ा जिले में प्रवेश करती है तथा डूंगरपुर होकर गुजरात में बहती हुई अरब सागर में मिल जाती है। पौराणिक संदर्भों में बताया गया है कि इस नदी के जल में स्नान करने से पुण्यार्जन होता है और यही कारण है कि इसे वागड़ के जाये जन्मे ‘महीसागर’ तीर्थ की संज्ञा देते है व इसका स्नान-ध्यान करते हुए इसके प्रति अगाध आस्थाओं को प्रदर्शित करते हैं।  

    बांध क्षीरसागर, नीर अमृत और नहरें बनी है धमनियां: 

    मध्यप्रदेश और प्रतापगढ़ से आती अथाह जलराशि बहकर समुद्र में व्यर्थ ही चली जाती गर इस पर माही बांध का निर्माण न हुआ होता। वागड़ अंचल के विकास के पुरोधा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय हरिदेव जोशी के प्रयासों से अस्तित्व में आया माही बांध इस अंचल के निवासियों के मन में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का शयनस्थल स्वरूप क्षीरसागर की प्रतिकृति के रूप में स्थान बनाए हुए है। इस बांध में संग्रहित जल की एक-एक बूंद अमृतकण के समान है जो इस अंचल की भूमि को सिंचित कर जन-मन में प्राण फूंकने का उपक्रम कर रही है। जिस तरह मानव शरीर में शिराएं रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाकर जीवन का संचार करती है उसी तरह माही बांध की नहरें भी यहां के दूरस्थ ग्राम्यांचलों के खेतों तक पानी का संचार कर मानव जीवन का आधार बनी हुई हैं।  

    माही बजाज सागर परियोजना:  

    माहीडेम या माही बजाज सागर परियोजना के कारण ही आज वागड़ अंचल सरसब्ज है। स्वाधीनता सेनानी स्व. श्री जमनालाल बजाज की पुण्य स्मृति में इस बांध का नामकरण ‘माही बजाज सागर’ किया गया है । वागड़ अंचल की जीवनरेखा बनी माही बजाजसागर परियोजना एक बहुउद्देशीय परियोजना है और इस परियोजना से सिंचाई हेतु जल प्रवाह का शुभारम्भ तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी के कर कमलों द्वारा 1 नवम्बर, 1983 को किया गया था। माही नदी के जल उपयोग हेतु गुजरात एवं राजस्थान राज्यों के मध्य निष्पादित वर्ष 1966 के अनुबन्ध के अन्तर्गत माही बजाजसागर परियोजना का निर्माण किया गया है। मुख्य बांध की कुल भराव क्षमता 77 टीएमसी है एवं उपयोगी भराव क्षमता 60.45 टीएमसी है। अनुबंध के अनुसार बांध में संग्रहित उपयोगी जल में से 40 टीएमसी जल गुजरात राज्य एवं 16 टीएमसी जल राजस्थान राजय के उपयोग हेतु निर्धारित किया गया है। बांध का निर्माण गुजरात व राजस्थान के सहयोग से किया गया है। मुख्य बांध एवं सम्बन्धित निर्माण कार्यों की लागत में अनुबन्ध के अन्तर्गत गुजरात एवं राजस्थान का आर्थिक सहयोग 55ः45 प्रतिशत है।

    55 वर्ष पहले हुआ था शिलान्यास: 

     इस परियोजना का शिलान्यास वर्ष 1960 में किया गया था परंतु परियोजना का प्रारम्भिक निर्माण कार्य योजना आयोग द्वारा नवम्बर, 1971 में रुपये 31.36 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त होने पर प्रारम्भ किया गया। प्रारम्भ में स्वीकृत योजना से सिंचाई सुविधा 44,170 हैक्टेयर भूमि में देने का प्रावधान था, जिसे बढ़ाकर वर्ष 1974-75 में 80,000 हैक्टेयर किया गया था एवं 140 मेगावाट विद्युत क्षमता के दो विद्युतगृहों के निर्माण का प्रावधान रखा गया। पुनः वर्ष 1984-85 में कमाण्ड क्षेत्र को 80,000 हैक्टेयर से विस्तारित कर 1,23,500 हैक्टेयर करते हुए इसमें बांसवाड़ा जिले की आनन्दपुरी, भूंगड़ा, जगपुरा एवं डूंगरपुर जिले की माही सागवाड़ा नहर को सम्मिलित किया गया, परन्तु केन्द्रीय जल आयोग द्वारा मई, 2002 में 80,000 हैटेयर कमाण्ड क्षेत्र के लिए स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें माही सागवाड़ा नहर के 0 से 8 किमी. तक के भाग एवं निठाउवा वितरिका को सम्मिलित किया गया।
    माही परियोजना का निर्माण तीन इकाईयों में किया गया था।  प्रथम इकाई के अन्तर्गत 435 मीटर लम्बे एवं अधिकतम 74.5 मीटर ऊंचे चुनाई एवं कंकरीट बांध का निर्माण किया गया है एवं दांये तथा बांये किनारों पर 2,674 मीटर लम्बा मिट्टी के बांध का निर्माण किया गया है, जिसकी अधिकतम ऊंचाई 43 मीटर है। द्वितीय इकाई में नहरों एवं वितरण प्रणाली के तहत मुख्य बांध की परिधि पर स्थित विद्युतगृह-प्रथम के द्वारा सिंचाई हेतु जल कागदी पिकअप वियर से निकलने वाली दांई व बांई मुख्य नहर तक पहुंचाने से संबंधित निर्माण का हुआ। दांई मुख्य नहर एवं इसकी वितरण शाखा नहरें क्रमशः 71.72 किमी. एवं 977.50 किमी. लम्बी हैं वहीं दांई मुख्य नहर एवं इसकी वितरण शाखा नहरों की लम्बाई क्रमशः 36.12 किमी. एवं 1028 किमी. हैं। बांध के कुल 77 टी.एम.सी. पानी मंे से 64 टी.एम.सी. पानी का उपभोग सामान्यतः सिंचाई के लिए किया जा रहा हैै और इससे ही दोनों जिलों के खेतों की प्यास बुझकर रिकार्ड अन्न उत्पादन हो रहा है। 

    पन बिजलीघरों का भी हुआ निर्माण: 

    माही परियोजना के निर्माण की तृतीय इकाई में विद्युत गृह एवं सम्बन्धित कार्य संपादित किए गए। इसके तहत मुख्य बांध की परिधि पर सैडल बांध नम्बर-5 पर स्थित सतही विद्युत गृह प्रथम एवं ग्राम लीलवानी के समीप सतही विद्युत  गृह द्वितीय का निर्माण किया गया है। इस इकाई के अन्तर्गत विद्युत गृह प्रथम से प्राप्त जल को सिंचाई हेतु कागदी पिकअप वियर तक पहुंचाने के लिए 1462 मीटर लम्बी सुरंग एवं 3090 मीटर लम्बी नहर का निर्माण किया गया है।  विद्युत गृह-प्रथम का निर्माण कार्य मई 1978 में प्रारम्भ हुआ था तथा इसकी कुल लागत 68 करोड़ रूपये है । विद्युत गृह -द्वितीय पर 1989 में ऊर्जा उत्पादन आरम्भ हुआ तथा उसकी लागत 120 करोड़ रूपये है ।  यह राजस्थान का पहला स्वदेशी मशीनों द्वारा निर्मित पन बिजली घर है । पावर हाउस-प्रथम पर 25 मेगावाट की 2 मशीनें है, तथा उनकी कुल क्षमता 50 मेगावाट है । पावर हाउस-द्वितीय, बागीदौरा पर 2 मशीनें हैं,तथा उनकी कुल क्षमता  90 मेगावाट है । इस प्रकार माही हाईडल प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 140 मेगावाट है । पावर हाउस-प्रथम का राष्ट्र को समर्पण 13 फरवरी 1986 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी के कर कमलों से हुआ था ।  माही बांध की बदौलत बांसवाड़ा जिला रिकार्ड बिजली उत्पादन करने वाला जिला भी बना है और अब तक माही के पानी के उपयोग के माध्यम से जिले के स्थापित दोनों जल विद्युत गृहों से करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ है। 
निश्चय ही माही मैया इस अंचल की जीवनरेखा के रूप जहां सिंचाई के लिए पर्याप्त जलराशि मुहैया करवा रही है वहीं बिजली उत्पादन के रूप में भी आम जनजीवन को रोशन करने का उदात्त उपक्रम कर रही है। माही मैया के इसी उपक्रम को स्मरण करने के पुण्य पर्व माही महोत्सव के शुभ मौके पर समूचे वागड़ अंचल को बधाई व शुभकामनाएं। 
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कमलेश शर्मा 
सहायक निदेशक, 
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग डूंगरपुर
मोबाईल 9414111123
  फोटो - 
01: माही बांध का निर्माणाधीन कार्य । 
02: निर्माणाधीन माही बांध पर कार्यरत श्रमिक।  
03-06: निर्माणाधीन माही बांध।   
07 तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवचरण माथुर 20 सितंबर 1984 को विद्युत परियोजना की स्थापना अवसर पर । 
 08: गेमन पुल पर स्थित मंदिर में माही मैया की प्रतिमा। 
09: माही बांध से निकलने वाली जलराशि।
10: माही बांध का विहंगम दृश्य। 
11. माही बांध का चाचाकोटा स्थित बेकवाटर व पसरी हरियाली का विहंगम दृश्य।
12. माही बांध के बैकवाटर में हरितिमायुक्त टापू। 
13. माही महोत्सव के तहत पूर्व वर्षों में आयोजित नौकायन प्रतियोगिता का दृश्य। 
14. माही महोत्सव के तहत पूर्व वर्षों में आयोजित सांस्कृतिक निशाओं के दृश्य। 



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माही महोत्‍सव की शुभकामनाएं



Sunday, December 9, 2012

दो दिवसीय रंगारंग माही महोत्सव 28-29 November 2012



माही को सम्मान, संस्कृति का गुणगान

जिले की नैसर्गिक व सांस्कृतिक विविधता से देश-प्रदेश को रू-ब-रू करवाने के उद्देश्य से  दो दिवसीय रंगारंग माही महोत्सव  बांसवाड़ा के कुशलबाग मैदान में आयोजित किया गया। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में इस महोत्सव में दो दिनों तक लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम रही और  देशभर की आदिम सांस्कृतिक कलाओं के साथ वागड़ अंचल की कलाओं ने एक मंच पर अपने वैविध्य को प्रस्तुत किया। 

शंखनाद से हुआ शुभारंभ, गजराज ने किया नेतृत्वः 

महोत्सव के शुभारंभ समारोह का प्रमुख आकर्षण भव्य शोभायात्रा थी। शोभायात्रा का शुभारंभ शहर के कुशलबाग मैदान में शंखनाद से हुआ। कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, नगरपरिषद सभापति राजेश टेलर व समाजसेवी चांदमल जैन द्वारा दीपप्रज्वलन के बाद जैसे ही समाजसेवी भुवुन मुकुन्द पण्ड्या ने शंखनाद किया तो महोत्सव के आयोजन से उल्लसित चेहरों पर दुगुनी चमक छा गई। माही मैया की जय के साथ शोभायात्रा ने कुशलबाग मैदान से प्रस्थान किया। इस शोभायात्रा में कलक्टर गुप्ता, जिला प्रमुख मालवीया, नगरपरिषद सभापति टेलर, समाजसेवी जैन, उप सभापति अमजद हुसैन, पूर्व विधायक रमेश पण्ड्या सहित बड़ी संख्या में अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों भाग लिया।




























शोभायात्रा का नेतृत्व गजराज कर रहे थे तो उनके पीछे आकर्षक वेशभूषा में लोक कलाकारों के दल अपनी प्रस्तुतियां देते हुए चल रहे थे।  घोडा़ंे और ऊॅंटों पर भी आकर्षक वेशभूषा में लोक कलाकार बैठे हुए थे।




 इसके अलावा  गैर नर्तकों के दल, देशी ढोल, कुण्डी और थाली की स्वर लहरियां बिखेरते हुए वादक दल तथा जिले की समस्त पंचायत समितियों से पहुंचे  लोक कलाकार नाचते-गाते हुए शोभायात्रा में आकर्षण बिखेर रहे थे।




शोभायात्रा में नगर क्षेत्र की पन्द्रह शिक्षण संस्थाओं की सैकड़ों बालिकाएं पारम्परिक वेशभूषा व आकर्षक कलश लेकर सम्मिलित हुई  । इसके साथ ही शहर के विभिन्न  स्कूलों के बैण्ड दलों ने भी स्वरलहरियों से शहर को गुंजायमान कर दिया। एक किलोमीटर से अधिक लंबी इस शोभायात्रा को देखने के लिए शहरवासी भी उमड़े।  शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः कुशलबाग मैदान में ही थमी।


विदेशी हाथों में रची देशी हीना: 

माही महोत्सव के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने के लिए विदेशी सैलानी भी पहुंचे और विभिन्न आयोजनों का लुत्फ उठाया। विदेशी सैलानियों ने मटका दौड़ और रस्साकस्सी का भी आनंद उठाया। विदेशी युवतियों ने यहां पर अपने हाथों में देशी हीना भी रचाई और इस महोत्सव की यादों को अपने मानसपटल पर अंकित किया।



  हॉट एयर बैलून व पैरासेलिंग से हुए रोमांचित

माही महोत्सव के तहत कुशलबाग मैदान में एडवेंचर स्पोर्ट्स के तहत हॉट एयर बैलून से आसमां की सैर और पैरा सेंलिग व जोरबिग बॉल से शहरवासी बड़े रोमांचित हुए।  शहर के कुशलबाग मैदान में विशाल गुब्बारे को देखकर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे और हॉट एयर बैलून में बैठकर करीब तीन सौ फीट से शहर का नज़ारा देखकर आनंद उठाया। हॉट एयर बैलून में बैठने के आनंद का संवरण अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने भी किया।




  शोभायात्रा उपरांत   जिला कलक्टर के.बी. गुप्ता, जिला प्रमुख श्रीमती रेशम मालवीया, समाजसेवी चांदमल जैन, नगरपालिका के सभापति राजेश टेलर सहित अनेक जनप्रतिनिधियों ने हॉट एयर बैलून में बैठकर कुशलबाग की सैर की और सैकडों फिट ऊॅंचाई से कुशलबाग के आस- पास के क्षेत्र का नज़ारा देखा।




  हॉट एयर बैलून, पैरा सेलिग एवं जोरबिंग बॉल  का मज़ा लेने के लिए आज दिनभर लोगों की भीड़ उमड़ी । हॉट एयर बैलून के प्रति बच्चों में विशेष उत्साह था और उन्होंने लाईन लगाकर इसमें सैर का आनंद उठाया।  बच्चों के साथ आए अभिभावकों ने भी समस्त इवेंटों का जमकर आनन्द लिया। दूसरी ओर रोमांच के इच्छुक लोगों ने कागदी पिक अप वियर में वाटर स्पोटर््स का भी जमकर लुत्फ उठाया।  





 खेलकूद प्रतियोगिताएं हुईः 

महोत्सव के  तहत कुशलबाग मैदान में ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताएं हुई जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने उत्साह से हिस्सा लिया। ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं के तहत तीरंदाजी, रस्सा-कस्सी और मटका दौड प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।  जिला खेल अधिकारी महेश चंद्र गौतम के निर्देशन में हुई इन प्रतियोगिताओं के प्रति खिलाड़ियों में विशेष उत्साह देखा गया। रस्सा कस्सी प्रतियोगिता पुरूष वर्ग में 16 दलों ने भाग लिया जिसमें प्रथम स्थान राजभोई माली समाज बांसवाड़ा ने तथा द्वितीय स्थान उपला घण्टाला के ग्रामीणों के दल ने प्राप्त किया। इसी प्रकार महिला वर्ग रस्साकस्सी में प्रथम स्थान पर हरिदेव जोशी कन्या महाविद्यालय रेंजर्स दल और द्वितीय स्थान पर उपला घण्टाला की महिलाओं ने प्राप्त किया। इसी प्रकार मटका दौड़ में महिला वर्ग में 38 महिलाओं ने भाग लिया। प्रथम स्थान भवानपुरा की पारी/मोहनलाल ने, द्वितीय स्थान रमीला/रामलाल ने तथा तृतीय स्थान मीना ने प्राप्त किया। प्रतियोगिता उपरांत विजेताओं को जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता, उपभोक्ता मंच सदस्य शैलेन्द्र भट्ट तथा उपखण्ड अधिकारी वारसिंह ने नकर पुरस्कार प्रदान किए।



  कुशलबाग में स्थापित हुआ गांव,  जीवंत हुआ ग्रामीण परिवेश

महोत्सव के तहत कुशलबाग मैदान में ग्रामीण परिवेश को जीवंत किया गया। यहां पर एक छोटा सा गांव स्थापित किया गया जिसमें झोपड़ी, पशुपालन और ग्रामीण परिवेश से संबंधित समस्त गतिविधियों का एक लघुरूप प्रस्तुत किया गया।  इस गांव को तैयार करने में एसीईओ विजयसिंह नाहटा के निर्देशन में विनोद पानेरी, अशोक सेन, प्रतिभावान शिक्षिका प्रीति कुलश्रेष्ठ, कमलेश सक्सेना, दक्षा उपाध्याय, उषा शर्मा, जीवीटी के उदयलाल गुर्जर, एच.के.तंवर, आशीष शर्मा, कोदरलाल बुनकर, रामनिवास गुप्ता तथा भरत देासी, प्रभात शाह, प्रदीप राठौड़, वासुदेव शर्मा, शैलेन्द्र सर्राफ ने अपनी सेवाएं दी।  

मिस्टर और मिस माही प्रतियोगिता में उमड़ा उत्साह: 

रंगारंग माही महोत्सव के तहत  मिस्टर एवं मिस माही प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । प्रतियोगिता में पराग चौबीसा को मिस्टर माही तथा बेनज़ीर खान को मिस माही का खिताब प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के तहत मिस्टर माही के लिए कुल सात प्रतिभागियों तथा मिस माही के लिए चार प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में 18-25 वर्ष आयु वर्ग के न्यूनतम दसवीं उत्तीर्ण इन अविवाहित युवक-युवतियों ने तीन राउण्ड में अपने व्यक्तित्व और कौशल का प्रदर्शन किया। पहला राउण्ड  स्वपरिचय का, दूसरा राउण्ड प्रतिभा प्रदर्शन तथा तीसरा राउण्ड बौद्धिक कौशल का हुआ जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ अपनी प्रस्तुतियां दी।  मिस्टर माही प्रतियोगिता में आरीफ मोहम्मद, दीपक त्रिपाठी, अंकित निगम, ताहेर शेरानी, ज़हीर अब्बास, पराग चौबीसा और राजेश चरपोटा ने तथा मिस माही प्रतियोगिता के लिए चांदनी राठौड़, वैशाली माथुर, रूबिना मंसूरी व बेनज़ीर खान पठान ने प्रस्तुतियां दी।
 जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता ने प्रतियोगिता के तीनों राउण्ड में अव्वल रहने पर शहर के पैलेस रोड़ निवासी पराग चौबीसा को मिस्टर माही तथा इंदिरा कॉलोनी निवासी बेनज़ीर खान पठान को मिस माही के खिताब के लिए नाम की उद्घोषणा की।



 दोनों विजेता प्रतिभागियों को जिला कलक्टर गुप्ता सहित नगर परिषद सभापति राजेश टेलर, उपभोक्ता मंच सदस्य शैलेन्द्र भट्ट आदि ने सैश पहनाया, नकद राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।












प्रतियोगिता के निर्णायक मीनाक्षी मीणा, एसडीओ वारसिंह, डॉ.सीमा भूपेन्द्र व क्विज मास्टर डॉ. महिपालसिंह राव थे। इस मौके पर प्रतियोगिता आयोजन समिति के नोडल अधिकारी डॉ. डी.के. जैन व अध्यक्ष डॉ. क्षिप्रा राठौड़ ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रतियोगिता को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी और  युवा पहुंचे। प्रतियोगिता का संचालन सतीश आचार्य और नमिता कुलश्रेष्ठ ने किया। 

जल और नभ में दिखे मनोहारी नज़ारे 

  जन-मन में देवताओं की दिवाली के रूप मनाई जाने वाली कार्तिक पूर्णिमा की संध्या कुछ विशेष ही नज़ारों को लिए हुए उसवक्त यादगार बन गई जब माही महोत्सव के तहत कागदी पिक-अप वियर पर दीपदान के तहत प्रवाहित दीपकों ने जल में तथा कुशलबाग मैदान में आतिशबाजी के तहत नभ में दागे गए आतिशी नज़ारों ने जल और नभ को एक साथ सौंदर्य सृृष्टि प्रदान की।  माही महोत्सव आयोजन के रूप में चार वर्षों बाद इस अनोखे नज़ारों के गवाह बने हजारों शहरवासी। सायं कागदी पिक-अप वियर पर माही महोत्सव के तहत दीपदान कार्यक्रम में हजारों शहरवासियों ने जल में दीप प्रवाहित कर महोत्सव के प्रति अपनी श्रद्धाएं व्यक्त की। इस मौके पर पानी पर तैरते हज़ारों दीपकों ने जमीं पर ही तारे उतार देने का नज़ारा प्रस्तुत किया।




 इसी तरह कुशलबाग मैदान में प्रदेश के ख्यातनाम शोरगर उस्मान भाई ने एक के बाद एक अनोखे आतिशी नज़ारों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। शोरगर उस्मान ने 25 विभिन्न प्रकार के आतिशी नज़ारों के 55 आईटमों के माध्यम से दिवाली सा नज़ारा प्रस्तुत किया। ये सभी आतिशी नज़ारे आसमां के सितारों से होढ़ करते नज़र आए। आकर्षक आतिशबाजी को देखने के लिए हजारों की संख्या में शहरवासी मौजूद थे। 

वागड़ गंगा माही के नाम रहा दूसरा दिन: 

  वागड़ अंचल की लोक संस्कृति की धड़कन ‘माही महोत्सव’ का दूसरा दिन पूर्णरूप से ‘वागड़ गंगा माही’ के नाम रहा। गुरुवार को यहां के रहवासियों ने जन-मन में प्राण फूंकती माही मैया की आराधना पूजा के साथ इसके प्रति श्रद्धाओं की अनोखी अभिव्यक्तियां देकर कृतज्ञता जताई।  महोत्सव के दूसरे दिन प्रातः 6.30 बजे ‘रन-फोर माही’ का आयोजन किया गया।


 शहर के गांधी मूर्ति तिराहे से जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता, नगर परिषद सभापति राजेश टेलर ने हरी झण्डी दिखाकर ‘रन-फोर-माही’ को रवाना किया और इस दौड़ को नेतृत्व दिया। कलक्टर और अन्य जनप्रतिनिधियों को इसमें दौड़ता देख कई लोग जुड़े। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, शहरवासी और युवाओं ने गांधी मूर्ति तिराहे से एसपी चौराहा होते हुए डायलाब तक सामूहिक दौड़ लगाते हुए माही महोत्सव के प्रति अपने जुड़ाव को प्रदर्शित किया।   रन-फॉर-माही में अपनी भागीदारी निभाने वाले प्रतिभागियों को डायलाब तालाब पर सरप्राईज गिफ्ट भी प्रदान किए गए।  



विकास के वरदान के लिए माही मैया को किया नमन :

महोत्सव के तहत  बांसवाड़ावासियों ने जिले को विकास का वरदान प्रदान करने के लिए गेमन पुल पहुंच कर माही मैया की पूजा अर्चना कर नमन किया।





  जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता, बांसवाड़ा विधायक अर्जुनसिंह बामनिया व नगर परिषद सभापति राजेश टेलर ने पं. मगनलाल त्रिवेदी, पं. इच्छाशंकर जोशी व पं. अशोक शुक्ला के आचार्यत्व में गेमन पुल पर स्थित माही मैया के मंदिर के गर्भगृह में देवी प्रतिमा की पूजा अर्चना की और देवी को पुष्पहार पहना कर नमन किया।   माही मैया की प्रतिमा की पूजा अर्चना उपरांत समस्त अतिथियों ने गेमन पुल में माही नदी को अर्घ्य चढ़ाया और देवी का नमन कर जिले की सर्वतोमुखी खुशहाली की कामना की।

 






नौकायन प्रतियोगिता में उमड़े ग्रामीण:  

माही महोत्सव के दूसरे दिन का प्रमुख आकर्षण गेमन पुल में नौकायन प्रतियोगिता का आयोजन था। दूर-दूर तक पसरी जलराशि में नौकाओं की दौड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी और ग्रामीण उमड़े। जैसे ही जिला कलक्टर कुंजबिहारी गुप्ता और विधायक अर्जुनसिंह बामनिया ने व्हीसल बजाकर नौका चालकों को रवाना किया तो गजब की फुर्ती के साथ चालकों ने नौकाओं को चप्पूओं के सहारे भगाना प्रारंभ किया। अथाह जलराशि में नौकाओं की दौड़ को देखने के लिए जुटे ग्रामीणों ने तालियां बजाकर हौसला अफज़ाई की। एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के बाद जैसे ही नौकाएं वापस अंतिम बिन्दु पर पहुंची तो लोगों ने अव्वल रहने वाले नौकाचालकों को दुगुनी ऊर्जा के साथ स्वागत किया।





रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा: 

महोत्सव के तहत दो सांस्कृतिक निशाओं का आयेाजन किया गया। इनमें स्थानीय लोक कलाकारों के साथ आदिम सांस्कृतिक कलाओं से जुड़े देश के ख्यातनाम कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर लोगों को मन मोहा। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाकारों ने आदिम नृत्यों की प्रस्तुतियां दी वहीं इण्डियन आईडल फेम बांसवाड़ा के चरित दीक्षित और दीपाली के गीतों पर समूचा बांसवाड़ा झूमता नज़र आया।







रंगों और हीना से हुई भावाभिव्यक्ति 

माही महोत्सव में बांसवाड़ा का सूचना केन्द्र उत्सवी माहौल से सराबोर रहा। महोत्सव के तहत यहां पर रंगोली, मेहंदी व चित्रकला प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों और युवा कलाकारों का सैलाब सा उमड़ पड़ा था। माही महोत्सव के प्रति रंगों व कल्पनाओं के सहारे भावाभिव्यक्ति की इन प्रतियोगिताओं में शहर के स्कूली विद्यार्थियों व युवतियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और विविध माध्यमों से अपने हुनर की अभिव्यक्तियां दी। सभी प्रतियोगिताएं कनिष्ठ व वरिष्ठ वर्ग में सम्पन्न हुई।










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- कमलेश शर्मा
जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी, 
बांसवाड़ा (राज.) Cell  9414111123